मैंने ख़ुदा से एक छोटी सी दुआ मांगी दुआ में उससे अपनी मौत मांगी 

 

ख़ुदा ने कहा बेशक मैं तुझे मौत दे दूं पर उसे क्या दूं जिसने तेरी लंबी उमर की दुआ मांगी

जिंदगी देने वाले , मरता छोड़ गये,  अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये,जब


 पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की, वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये

गुनाह करके सज़ा से डरते हैं, जहर पी के दवा से डरते हैं,

दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं, हम तो दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं |

कोई अच्छी सी सज़ा दो मुझको,चलो ऐसा करो भूला दो मुझको,

तुमसे बिछडु तो मौत आ जाये दिल की गहराई से ऐसी दुआ दो मुझको |

ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं, तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक

 

हैं, वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,    हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं |

हर एक सांस पर तेरा नाम लिए जा रहे है हर चहरे में तेरा चहरा देखे जा रहे

 

है, तुम्हारे तसव्वुर में इस कदर बैठे है अंदाजा भी नहीं होगा कितने जाम पिए जा रहे है|

तुम्हारे साथ जीने की तमन्ना रहा गई बाकी क्या हुआ जो इस बार झोली रहा

 

गई खाली,माँग लेंगे खुदा से हर जन्म के लिए फिर ना रहेगी कोई ख़्वाहिश बाकी

तेरे इंतजार मे कब से उदास बैठे है तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे है

तू एक नज़र हम को देख ले इस आस मे कब से बेकरार बैठे है


आँसू भी थोड़ा ठहर कर सोचते है हम तन्हाई मे ही क्यूँ निकलते है

दर्द-ऐ-हाल तो दिल का बयान करते है फिर हम क्यूँ छुप छुप कर रोते है

मोहब्बत ही नहीं देती इम्तहान जिंदगी में ये बदनसीबी तो चाँद तारों के साथ

 

भी होतीहै,मोहब्बत ही बेआबरू नहीं होती जग में ग्रहण की छाया तो तारों पर भी होती है

 

करोगे फरियाद गुजरे ज़माने को तरसोगे हम साथ फक पल बिठाने को,


फिरआवाज़ दोगे हमें आने को हम कहेगे दरवाजा नहीं है कब्र से बाहर आने को,

ऐ जालिम  बेवफा पानी में पत्थर मत फेक उस पानी को भी कोई पीता है


ऐ बेवफा इस दिल को मत तोड़ इस दिल में भी कोई रहता है

दर्द मेरे दिल का कोई भी ना जाने ना कोई मेरी वफ़ा पहचाने


जिसका सहारा बना था कभी मै वो  ही लगे दिल को दुखाने,

ना डालो मेरे मुह पे कफ़न मुझे आदत है मुस्कुराने की


मत दफनाओ मेरी लाश को क्योंकी मुझे उम्मीद है उनके आने की,

कोई वादा नहीं फिर भी तेरा इंतज़ार है! जुदाई के बाद भी तुम से प्यार है!

 

तेरे चेहरे की उदासी बता रही है! मुझसे मिलने के लिये तू भी बेकरार है!

मोहब्बत मुझे थी उसी से सनम! यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा!

 

मौत भी मेरी चाहत को रोक न सकी! कब्र में भी यह दिल धड़कता रहा!

सोचा याद न करके थोड़ा तड़पाऊं उनको! किसी और का नाम लेकर जलाऊं उनको!

 

पर चोट लगेगी उनको तो दर्द मुझको ही होगा! अब ये बताओ किस तरह सताऊं उनको!

जीना चाहते हैं मगर ज़िन्दगी रास नहीं आती! मरना चाहते हैं मगर मौत पास नहीं आती!

 

बहुत उदास हैं हम इस ज़िन्दगी से! उनकी यादें भी तो तड़पाने से बाज़ नहीं आती!

एक दिन हमारे आंसूं हमसे पूछ बैठे! हमे रोज़ - रोज़ क्यों बुलाते हो! हमने कहा हम याद तो

 

उन्हें करते हैं तुम क्यों चले आते हो!

जब तक तुम्हें न देखूं! दिल को करार नहीं आता! अगर किसी गैर के साथ देखूं! तो फिर

 

सहा नहीं जाता!

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है! दिल न चाह कर भी, खामोश रह जाता है!

 

कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है! कोई कुछ न कहकर भी, सब बोल जाता है!

तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है! खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है!

 

फिर आवाज़ लगायी जाती है आ जाओ दर्दे दिलवालों! यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है!

इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं! गम - ऐ - जुदाई से सब डरते हैं हम तो न इश्क करते हैं 

 

मुहब्बत! हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!

न वो आ सके न हम कभी जा सके! न दर्द दिल का किसी को सुना सके! बस बैठे है यादों में

 

उनकी! न उन्होंने याद किया और न हम उनको भुला सके!

 

बड़ी कोशिश के बाद उन्हें भूला दिया! उनकी यादों को दिल से मिटा दिया! एक दिन फिर

 

उनका पैगाम आया लिखा था मुझे भूल जाओ! और मुझे भूला हुआ हर लम्हा याद दिला दिया!

बड़ी मुश्किल में हूँ! मैं कैसे इज़हार करू! तुम तो खुशबु हो! तुमको कैसे कैद करू!

कल फुर्सत न मिली तो क्या होगा! इतनी मोहलत न मिली तो क्या होगा!

 

रोज़ कहते हो कल मिलेंगे, कल मिलेंगे! कल मेरी आँखे न खुली तो क्या होगा!

सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा! सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा! न जाने

 

क्या बात थी उन मे और हम मे! सारी महफिल भूल गए बस वही एक चेहरा याद रहा!

आज यह कैसी उदासी छाई है! तन्हाई के बादल से भीगी जुदाई है!

 

रोया है फिर मेरा दिल! जाने आज किसकी याद आई है!

माना की तुम जीते हो ज़माने के लिये! एक बार जी के तो देखो हमारे लिये!

 

दिल की क्या औकात आपके सामने! हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये!

जिंदगी हर पल कुछ खास नहीं होती! फूलों की खुशबू पास नहीं होती!

 

मिलना हमारी तक़दीर में था वरना! इतनी प्यारी दोस्ती इतफाक नहीं होती!

जिंदगी हर पल कुछ खास नहीं होती! फूलों की खुशबू पास नहीं होती!
मिलना हमारी तक़दीर में था वरना! इतनी प्यारी दोस्ती इतफाक नहीं होती!

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है? जो नहीं मिल सकता उसी से मुहब्बत क्यों है?
कितने खायें है धोखे इन राहों में! फिर भी दिल को उसी का इंतजार क्यों है?

रात हुई जब शाम के बाद! तेरी याद आई हर बात के बाद!
हमने खामोश रहकर भी देखा! तेरी आवाज़ आई हर सांस के बाद!

दिल जब टूटता है तो आवाज नहीं आती! हर किसी को मुहब्बत रास नहीं आती!
ये तो अपने-अपने नसीब की बात है! कोई भूलता नहीं और किसी को याद भी नहीं आती!

काश दिल की आवाज़ में इतना असर हो जाये! हम आपको याद करे और आपको खबर हो जाये!
रब से बस इतनी दुआ करते हैं! आप जो चाहे आपको मिल जाये!

जिंदगी शुरू होती है रिश्तों से! रिश्ते शुरू होते है प्यार से!
प्यार शुरू होता है अपनों से! और अपने शुरू होते है आप से!

साथ रहते रहते वक़्त गुज़र जाएगा! दूर होने के बाद कौन किसे याद आएगा!
जी लो ये पल जब तक हम साथ है! कल का क्या पता हम हो न हो!

कभी किसी से प्यार मत करना! हो जाये तो इंकार मत करना!
चल सको तो चलना उस राह पर! वरना किसी की ज़िन्दगी ख़राब मत करना!

शाम होते ही ये दिल उदास होता है! टूटे ख्वाबों के सिवा कुछ न पास होता है!
तुम्हरी याद ऐसे वक़्त बहुत आती है! जब कोई बन्दर आस-पास होता है!

दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं! हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ!
कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब! मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं!

प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता! ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता!
दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की! उस के बिना जिया नहीं जा सकता!

शादी करनी थी पर किस्मत खुली नहीं! ताज बनाना था पर मुमताज मिली नहीं!
एक दिन किस्मत खुली और शादी हो गई! अब ताज बनाना है पर यह मुमताज मरती ही नहीं!

तुझे भूलकर भी न भूल पायेगें हम! बस यही एक वादा निभा पायेगें हम!
मिटा देंगे खुद को भी जहाँ से लेकिन! तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम!

मुहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं! प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं!
मुद्दतें बीत जाती हैं किसी के इंतज़ार में! ये सिर्फ पल-दो-पल का काम नहीं!

वो दर्द ही क्या जो आँखों से बह जाए! वो खुशी ही क्या जो होठों पर रह जाए!
कभी तो समझो मेरी खामोशी को!m वो बात ही क्या जो लफ्ज़ आसानी से कह जायें!

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है? जो नहीं मिल सकता उसी से मुहब्बत क्यों है?

 

कितने खायें है धोखे इन राहों में! फिर भी दिल को उसी का इंतजार क्यों है?

रात हुई जब शाम के बाद! तेरी याद आई हर बात के बाद!

 

हमने खामोश रहकर भी देखा! तेरी आवाज़ आई हर सांस के बाद!

दिल जब टूटता है तो आवाज नहीं आती! हर किसी को मुहब्बत रास नहीं आती!

 

ये तो अपने-अपने नसीब की बात है! कोई भूलता नहीं और किसी को याद भी नहीं आती!

काश दिल की आवाज़ में इतना असर हो जाये! हम आपको याद करे और आपको खबर हो

 

जाये! रब से बस इतनी दुआ करते हैं! आप जो चाहे आपको मिल जाये!

जिंदगी शुरू होती है रिश्तों से! रिश्ते शुरू होते है प्यार से! प्यार शुरू होता है अपनों से! और

 

अपने शुरू होते है आप से!

साथ रहते रहते वक़्त गुज़र जाएगा! दूर होने के बाद कौन किसे याद आएगा! जी लो ये पल

 

जब तक हम साथ है! कल का क्या पता हम हो न हो!

कभी किसी से प्यार मत करना! हो जाये तो इंकार मत करना! चल सको तो चलना उस

 

राह पर! वरना किसी की ज़िन्दगी ख़राब मत करना!

चेहरे पर अश्कों की लक़ीर बन गई जो न चाहा था वो ही तक़दीर बन गई हमने तो रेत पर

 

चलाई थीं उंगलियां देखा तो आपकी तस्वीर बन गई।